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विश्‍वविद्यालय में ‘हिंदी लेखन कौशल : एक संवाद’ विषय पर राजभाषा कार्यशाला सम्पन्न

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सागर। विश्‍वविद्यालय के कुलपति प्रो. यशवंत सिंह ठाकुर के मार्गदर्शन में विश्‍वविद्यालय के राजभाषा प्रकोष्‍ठ द्वारा विश्‍वविद्यालय के अधिकारियों एवं कर्मचारियों हेतु आयोजित ‘हिंदी लेखन कौशल : एक संवाद’ विषयक एक दिवसीय हिंदी कार्यशाला उत्साहपूर्ण वातावरण में सम्पन्न हुई। कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य प्रतिभागियों के राजभाषा हिंदी के प्रति ज्ञान-विस्तार, व्यक्तित्व विकास, भाषा-संवर्धन तथा व्यावहारिक अनुभव को समृद्ध करना रहा।

कार्यक्रम में विषय-विशेषज्ञ के रूप में उपस्थित डॉक्‍टर हरीसिंह गौर विश्‍वविद्यालय, सागर के पूर्व अधिष्‍ठाता एवं हिन्‍दी विभाग के पूर्व अध्‍यक्ष प्रो. आनंदप्रकाश त्रिपाठी ने अपने व्याख्यान में हिंदी लेखन की संरचना, विचारों की तार्किक अभिव्यक्ति, भाषा की शुद्धता एवं सृजनात्मकता के महत्व पर विस्तार से प्रकाश डाला।

कार्यशाला का विषय प्रवर्तन करते हूए कार्यक्रम के संयोजक तथा विश्‍वविद्यालय के संयुक्‍त कुलसचिव एवं राजभाषा अधिकारी संतोष सोहगौरा ने कहा कि वर्तमान प्रतिस्पर्धी युग में प्रभावी लेखन कौशल व्यक्तित्व विकास का महत्वपूर्ण अंग है। भाषा व्यक्ति की पहचान और अभिव्यक्ति का सशक्त माध्यम है।
उक्‍त कार्यशाला में 50 से अधिक अधिकारियों एवं कर्मचारियों ने सक्रिय सहभागिता की। कार्यशाला में सहायक कुलसचिव राजकुमार पाल, ए.लक्ष्‍मी, ममता त्रिपाठी, सूचना विज्ञानी दयानंदप्‍पा कोरी, अनुभाग अधिकारी रोहित रघुवंशी सहित विभिन्‍न विभागों में कार्यरत अधिकारी एवं कर्मचारीगण उपस्थित रहे। इस दौरान प्रतिभागियों ने भी लेखन संबंधी जिज्ञासाएँ प्रस्तुत कीं तथा अपने अनुभव साझा किए। इस संवादात्मक वातावरण ने सीखने की प्रक्रिया को और अधिक जीवंत एवं सार्थक बनाया। प्रतिभागियों ने इसे ज्ञानवर्धक, प्रेरणादायक एवं व्यक्तित्व विकास की दृष्टि से अत्यंत उपयोगी बताया। यह कार्यशाला हिंदी भाषा के प्रति नवचेतना एवं रचनात्मक दृष्टिकोण को प्रोत्साहित करने की दिशा में एक सार्थक प्रयास सिद्ध हुई। अंत में राजभाषा प्रकोष्‍ठ के उच्‍च श्रेणी लिपिक विनोद रजक द्वारा धन्‍यवाद ज्ञापन के साथ कार्यशाला का समापन हुआ। संचालन हिन्‍दी अनुवादक अभिषेक सक्‍सेना ने किया। विशेष सहयोग राजेश सोनी एवं संतोष लोढ़कर का रहा।


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