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श्री हनुमान जन्मोत्सव:जय हनुमान ज्ञान गुन सागर। जय कपीस तिहुँ लोक उजागर।।

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जय हनुमान ज्ञान गुन सागर। जय कपीस तिहुँ लोक उजागर।। राम दूत अतुलित बल धामा। अंजनि-पुत्र पवनसुत नामा।।

सागर /डॉ. नीलिमा पिम्पलापुरे लेखिका, शिक्षाविद समाजसेविका


हनुमान जयंती हिन्दू धर्म का एक अत्यन्त पवित्र एवं महत्वपूर्ण पर्व है, जो भगवान हनुमान के जन्मोत्सव के रूप में मनाया जाता है। यह पर्व न केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक है, बल्कि यह भक्ति, साहस, निस्वार्थ सेवा और समर्पण जैसे महान जीवन मूल्यों की भी प्रेरणा देता है। भगवान हनुमान को शक्ति, बुद्धि और विद्या का देवता माना जाता है। उन्हें ‘‘संकटमोचन’’ भी कहा जाता है, जिसका अर्थ है-जो सभी संकटों को दूर करते है। ऐसी मान्यता है कि सच्चे मन से उनकी पूजा करने पर भय, दुःख, रोग और बाधायें दूर हो जाती हैं। हनुमान जयंती हमें यह सिखाती है कि जीवन में चाहे कितनी भी कनिाईयाँ क्यों न आयें, यदि भीतर दृढ़ विश्वास और समर्पण हो, तो हम हर समस्या का समाधान निकाल सकते हैं। यह पर्व आत्मबल एवं सकारात्मक ऊर्जा को भी बढ़ाने का भी माध्यम है।

पौराणिक कथा और जन्म प्रसंग –

धार्मिक ग्रन्थों के अनुसार, भगवान हनुमान का जन्म माता अंजना और वानरराज केसरी के यहाँ हुआ था उन्हें पवनदेव का आशीर्वाद प्राप्त था, इसलिए उन्हें ‘‘पवनपुत्र’’ कहा जाता है। भगवान हनुमान का जन्म हिन्दू धर्म के सबसे अद्भुत और प्रेरणादायक कथाओं में से एक है। उनका जन्म केवल एक सामान्य घटना नहीं, बल्कि देवताओं की योजना और दैवीय शक्तियों का परिणाम माना जाता है। यही कारण है कि उन्हें पवनपुत्र अर्थात् वायुदेव के पुत्र कहा जाता है।

हनुमान जी की माता अंजना एक अप्सरा थी, जिन्हें एक श्राप के कारण पृथ्वी पर जन्म लेना पड़ा। उन्होंने संतान प्राप्ति के लिए कठोर तपस्या की, उनके पति वानरराज केसरी एक वीर और पराक्रमी वानर थे। उनकी तपस्या से प्रसन्न होकर देवताओं ने उन्हें एक दिव्य पुत्र प्राप्त होने का आशीर्वाद दिया। हनुमान जी के जन्म में पवनदेव की महत्वपूर्ण भूमिका मानी जाती है। एक कथा के अनुसार, राजा दशरथ के पुत्रेष्टि यज्ञ से प्राप्त ‘‘खीर’’ का एक अंश पवनदेव द्वारा माता अंजना तक पहुँचाया गया। उस दिव्य प्रसाद के प्रभाव से हनुमान जी का जन्म हुआ। इसी कारण उन्हें वायु की गति, शक्ति और ऊर्जा का वरदान प्राप्त हुआ।

हनुमान जी का जन्म चैत्र मास की पूर्णिमा के दिन हुआ माना जाता है, जिसे आज हनुमान जयंती के रूप में मनाया जाता है। जन्म के समय ही वे असाधारण तेज, बल और ऊर्जा से युक्त थे। हनुमान जी का शरीर स्वर्ण के समान चमकता था और उनमें अलौकिक शक्तियाँ विद्यमान थीं। देवताओं ने उन्हें अनेक वरदान दिये-इन्द्र ने वज्र से अजेयता, सूर्य ने ज्ञान और ब्रह्मा ने अमरत्व का आशीर्वाद दिया।

बाल्यकाल की अद्भुत घटनायें –

बाल्यकाल में हनुमान जी अत्यन्त चंचल और जिज्ञासु थे। एक प्रसिद्ध कथा के अनुसार, उन्होंने ऊगते हुये सूर्य को लाल फल समझकर निकलने के लिए आकाश में छलाँग लगा दी। जब उन्होंने सूर्य की ओर उड़ान भरी, तो यह देखकर देवराज इन्द्र ने उन्हें वज्र से प्रहार किया, जिससे वे घायल हो गये। इससे क्रोधिक होकर पवनदेव ने समस्त संसार में वायु का प्रवाह रोक दिया। तब सभी देवताओं ने मिलकर हनुमान जी को जीवित किया और उन्होंने अनेक शक्तिशाली वरदान दिये। इस घटना के पश्चात् उनकी महिमा और भी बढ़ गई।

हनुमान जी की बाल लीलाओं के कारण कई ऋषि-मुनि उनसे परेशान हो गये थे। उन्होंने हनुमान जी को श्राप दिया था कि वे अपनी शक्तियों को तब तक भूल जायेंगे, जब तक कोई उन्हें उनकी शक्ति का स्मरण नहीं करायेगा। यही कारण है कि बाद में जाम्बवन्त ने उन्हें उनकी शक्ति का स्मरण कराया, जिससे वे समुद्र लांघकर लंका पहुँच सके। हनुमान जी जन्म हमें यह सिखाता है कि प्रत्येक व्यक्ति के भीतर अपार शक्ति छिपी होती है। आवश्यकता केवल उसे पहचानने और सही दिशा में उपयोग करने की होती है। वे भक्ति, साहस, विनम्रता और सेवा के आदर्श हैं। उनका जीवन हमें यह प्रेरणा देता है कि सच्ची भक्ति केवल शारीरिक नहीं, बल्कि मानसिक और आध्यात्मिक भी होती है। पवनपुत्र हनुमान का जन्म केवल पौराणिक कथा नहीं, बल्कि जीवन का एक गहरा संदेश है। यदि हममें विश्वास, भक्ति और समर्पण हो, तो हर असम्भव कार्य को भी हम सम्भव बना सकते हैं। इसलिए हनुमान जी को देवता के रूप के साथ-साथ एक प्रेरणा के रूप में भी देखा जाता है। रामायण में भगवान श्रीराम के प्रति उनकी अटूट भक्ति ने उन्हें अमर बना दिया। उनके पराक्रम-जैसे लंका दहन, संजीवनी बूटी लाना और सीता माता की खोज, उन्हें एक महान नायक के रूप में स्थापित किया है।

हनुमान जयंती के दिन भक्तगण सुबह प्रातः उठकर स्नान करके मंदिरों में जाकर भगवान हनुमान की पूजा-अर्चना करते हैं। पूजन के दौरान हनुमान चालीसा का पाठ, सुन्दर-काण्ड का पाठ एवं रामायण का पाठ किया जाता है। तेल, सिंदूर और चमेली के फूल अर्पित करके लड्डू और बूँदी का प्रसाद चढ़ाया जाता है। कई स्थानों पर अखण्ड रामायण पाठ, भजन-कीर्तन और भण्डारों का आयोजन किया जाता है। मंदिरों में विशेष सजावट और शोभा यात्रायें भी निकाली जाती हैं।

भगवान हनुमान का जीवन और उनके आदर्श गुण हमें कई महत्वपूर्ण सीख देते हैं। उनकी अटूट भक्ति जो उन्होंने अपने जीवन को पूरी तरह से भगवान श्रीराम की सेवा में समर्पित कर दिया। उनकी विनम्रता, असीम शक्ति होने के बावजूद वे हमेशा विनम्र और सेवाभावी रहे। साहस और पराक्रम, जो उन्होंने हर कठिन परिस्थिति का सामना निर्भीक होकर किया। उनकी बुद्धिमत्ता, जिससे वे केवल बलशाली ही नहीं, बल्कि अत्यन्त बुद्धिमान भी थे। उनकी निस्वार्थ सेवा, उन्होंने कभी भी अपने लिए कुछ नहीं चाहा, केवल दूसरों की भलाई के लिए कार्य किए।

आधुनिक जीवन में हनुमान जयंती का महत्व

आज के तेज रफ्तार और तनावपूर्ण जीवन में हनुमान जयंती का महत्व और भी बढ़ जाता है। यह पर्व हमें मानसिक शांति, आत्मविश्वास और सकारात्मक सोच विकसित करने की प्रेरणा देता है। युवाओं के लिए हनुमान जी एक आदर्श हैं, जो सिखाते हैं कि सफलता पाने के लिए शक्ति के साथ-साथ अनुशासन, समर्पण और विनम्रता भी आवश्यक है। हनुमान जयंती उत्सव के साथ ही साथ हमें जीवन को सही दिशा देने वाला प्रेरणादायक पर्व है। सच्ची भक्ति, कर्त्तव्यनिष्ठा और साहस से हम जीवन की हर चुनौती को पार कर सकते हैं। इस पावन अवसर पर हमें भगवान हनुमान जी के गुणों को अपने जीवन में अपनाने का संकल्प लेना चाहिए, ताकि हम एक बेहतर और संतुलित जीवन जी सकें।


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