बीएमसी के शासकीय कॉलेज ऑफ नर्सिंग को मिली 60 सीटों की सौगात

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डीन डॉ. पी.एस. ठाकुर के प्रयासों से बुंदेलखंड को मिली बड़ी उपलब्धि

ज्ञान गुण सागर/सागर।बुंदेलखंड मेडिकल कॉलेज, सागर के शासकीय कॉलेज ऑफ नर्सिंग को 60 सीटों की मंजूरी मिल गई है। यह उपलब्धि डीन डॉ. पी. एस. ठाकुर के पिछले दो वर्षों से किए जा रहे निरंतर प्रयासों, प्रशासनिक पहल और दूरदर्शी कार्यप्रणाली का परिणाम है। इस फैसले से सागर सहित समूचे बुंदेलखंड अंचल में चिकित्सा और शिक्षण व्यवस्था को एक नया आयाम मिलेगा।

वर्ष 2024 में नर्सिंग कॉलेज में प्रवेश पर रोक लग गई थी, जिसके बाद से ही संस्थान की व्यवस्थाओं को दुरुस्त करने और पुनः मान्यता व सीटें दिलाने के लिए निरंतर प्रयास किए जा रहे थे। आखिरकार डीन डॉ. पी. एस. ठाकुर के सतत प्रयासों से यह बड़ी सफलता हासिल हुई है। इस ऐतिहासिक उपलब्धि पर डीन डॉ. पी. एस. ठाकुर ने प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और उप मुख्यमंत्री श्री राजेंद्र शुक्ल का आभार व्यक्त करते हुए धन्यवाद प्रेषित किया है।

क्षेत्रीय विद्यार्थियों के लिए गुणवत्तापूर्ण शिक्षा का मार्ग प्रशस्त

बीएमसी सागर पहले से ही इस क्षेत्र में स्वास्थ्य सेवाओं का प्रमुख केंद्र रहा है। नर्सिंग की 60 सीटें मिलने से संस्थान में चिकित्सा एवं नर्सिंग शिक्षा का बेहतर समन्वय स्थापित होगा। इससे सागर के साथ-साथ दमोह, पन्ना, छतरपुर, टीकमगढ़ और निवाड़ी जिलों के विद्यार्थियों को उच्चस्तरीय नर्सिंग शिक्षा अपने ही क्षेत्र में उपलब्ध हो सकेगी। अब स्थानीय युवाओं को अध्ययन के लिए बड़े शहरों का रुख नहीं करना पड़ेगा।

स्वास्थ्य सेवाओं को मिलेगी नई मजबूती

संस्थान में 60 नर्सिंग सीटों की उपलब्धता से प्रशिक्षित नर्सिंग स्टाफ तैयार करने में मदद मिलेगी, जिसका सीधा लाभ बीएमसी और आसपास के शासकीय अस्पतालों को मिलेगा। कुशल नर्सिंग कर्मियों की उपलब्धता से मरीजों की देखरेख और अधिक सुचारू होगी, जिससे अंचल की स्वास्थ्य सेवाओं में गुणवत्तात्मक सुधार देखने को मिलेगा।

बीएमसी के मीडिया प्रभारी डॉ. सौरभ जैन ने इस उपलब्धि पर हर्ष व्यक्त करते हुए कहा कि, डीन डॉ. पी. एस. ठाकुर सर के कुशल नेतृत्व और सतत प्रयासों से संस्थान को यह ऐतिहासिक सफलता प्राप्त हुई है। 60 नर्सिंग सीटों का मिलना बीएमसी के शैक्षणिक और चिकित्सीय विस्तार की दिशा में मील का पत्थर साबित होगा। इससे न केवल अंचल के छात्र-छात्राओं को अपने ही घर के पास गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मिलेगी, बल्कि भविष्य में अस्पतालों को भी दक्ष एवं प्रशिक्षित नर्सिंग अमला प्राप्त होगा, जो जन-स्वास्थ्य सेवाओं को सुदृढ़ करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।


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