जैसीनगर में आयोजित हुआ ब्लॉक स्तरीय मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य उन्मुखीकरण कार्यक्रम; एएनएम, आशा व सीएचओ को मिला विस्तृत प्रशिक्षण
अगस्त माह में न छूटे एक भी हाई रिस्क केस (HRP); अनमोल 2.0 ऐप, यू-विन पोर्टल और सटीक लाइन लिस्टिंग से मजबूत होगा प्रबंधन
ज्ञान गुण सागर/सागर ।सागर जिले में मातृ एवं शिशु मृत्यु दर को न्यूनतम स्तर पर लाने एवं शून्य के लक्ष्य को हासिल करने की दिशा में जिला प्रशासन द्वारा लगातार ठोस कदम उठाए जा रहे हैं। कलेक्टर प्रतिभा पाल के कुशल मार्गदर्शन में जिले के सभी विकासखंडों में मैदानी स्वास्थ्य अमले का ब्लॉक स्तरीय उन्मुखीकरण एवं प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया जा रहा है। इसी क्रम में जैसीनगर विकासखंड में एएनएम, आशा कार्यकर्ता एवं सीएचओ के लिए एक दिवसीय गहन प्रशिक्षण सह-समीक्षा सत्र सफलतापूर्वक संपन्न हुआ।
प्रशिक्षण के दौरान कलेक्टर प्रतिभा पाल ने कहा कि वैश्विक स्तर पर नार्वे जैसे देशों ने अपनी बेहतर स्वास्थ्य प्रणालियों के बल पर मातृ मृत्यु दर और शिशु मृत्यु दर को 1 या शून्य के स्तर पर ला खड़ा किया है। हमारे देश में भी अन्य राज्य इसी तरह बेहतर कार्य कर रहे हैं। समान स्वास्थ्य व्यवस्थाओं और संसाधनों के बीच यदि अन्य राज्य यह उपलब्धि हासिल कर सकते हैं, तो सागर जिला भी सही कार्यप्रणाली और सटीक फॉलो-अप से इस अंतर को समाप्त कर सकता है।
कलेक्टर पाल ने कहा कि, मैदानी अमले को अनमोल 2.0 ऐप और यू-विन पोर्टल पर डेटा एंट्री के दौरान होने वाली व्यावहारिक गलतियों से बचने के लिए प्रशिक्षण दिया जा रहा है। प्रशिक्षण के दौरान स्पष्ट निर्देश दिए गए कि यदि ऐप संचालन में कोई तकनीकी समस्या आती है तो उसे फीडबैक भेजकर हल करें, परंतु डेटा प्रविष्टि में कोई कमी न छोड़ें। सही डेटा ही सही स्वास्थ्य प्रबंधन का आधार है।
योग्य दंपत्ति पंजीयन और एएनसी ट्रैकिंग:
पात्र योग्य दंपत्तियों के शत-प्रतिशत पंजीयन और समय पर प्रसव पूर्व जांच के निर्देश दिए गए। सुनिश्चित किया जाए कि जन्मा हुआ बच्चा समय पर आंगनवाड़ी केंद्रों तक पहुंचे और योजनाओं का लाभ उठाए।
हाई रिस्क प्रेगनेंसी की लाइन लिस्टिंग और ट्रैकिंग:
एएनएम द्वारा चिन्हांकन के बाद सीएचओ को प्रत्येक हाई रिस्क गर्भवती माता की पहचान और स्थिति की पूरी जानकारी होनी चाहिए। कलेक्टर ने कहा कि, हम लगातार सभी ब्लॉक में प्रशिक्षण सत्र आयोजित कर रहे हैं। अगस्त में हाई रिस्क प्रेगनेंसी का एक भी केस प्रबंधन से न छूटने पाए। तीसरी और चौथी जांचों के बाद स्वास्थ्य केंद्र स्तर पर हाई रिस्क गर्भवती की सूचना सभी को डाउन-लाइन अपडेट रहे। यदि किसी मरीज को जिला अस्पताल या बीएमसी में रिफर करने की आवश्यकता हो तो बीएमओ तुरंत समन्वय स्थापित कर अग्रिम सूचना प्रदान करें। इसी प्रकार प्रसव के पश्चात एसएनसीयू से डिस्चार्ज होकर घर आए शिशुओं का अनिवार्य रूप से फॉलो-अप लिया जाए। 56 दिनों तक प्रसूति पश्चात गृह भ्रमण सुनिश्चित किया जाए। प्रशिक्षण में प्रसव के बाद एएनएम और आशा कार्यकर्ताओं को गृह भ्रमण के दौरान पूछे जाने वाले प्रश्नों और आवश्यक जांचों के संबंध में भी व्यावहारिक मार्गदर्शन दिया गया।
केस स्टडी से सीखीं गलतियां, इंटरवेंशन से सुधरेगा प्रबंधन
प्रशिक्षण के दौरान पूर्व में हुई भूलों की केस स्टडीज प्रस्तुत की गईं, जिससे मैदानी कार्यकर्ताओं को यह समझ आ सके कि किस स्तर पर चूक हुई थी। उपस्थित अधिकारियों ने बताया कि मैदानी स्तर पर मानवीय भूलों और तकनीकी कमियों को न्यूनतम करके न केवल मातृ-शिशु मृत्यु दर में गिरावट लाई जा सकती है, बल्कि पूरे जिले की स्वास्थ्य प्रबंधन प्रणाली को अधिक सुदृढ़ और उत्तरदायी बनाया जा सकता है।
इस दौरान जिला पंचायत सीईओ
विवेक केवी, एसडीएम रोहित वर्मा, सीएमएचओ डॉ देवेश पटेरिया सहित स्वास्थ्य विभाग का अमला मौजूद रहा।