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सागर के ज्ञानचंद ने विश्वविद्यालय में सीखीं अभिनय की बारीकियां, बॉलीवुड में बना रहे अलग पहचान

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हाल ही में रिलीज हुई फिल्म ‘हीर सारा’ में निभाया ‘राजू मैकेनिक’ का किरदार, कई फिल्मों में कर चुके हैं काम

सागर। डॉ. हरीसिंह गौर विश्वविद्यालय के छात्र रहे सागर निवासी ज्ञानचंद अहिरवार बॉलीवुड फिल्म ‘हीर सारा’ को लेकर चर्चा में हैं। 12 जून को रिलीज़ हुई इस फिल्म में उन्होंने ‘राजू मेकेनिक’ का महत्वपूर्ण किरदार निभाया है। दर्शकों द्वारा उनके अभिनय को काफी सराहा जा रहा है। यह ज्ञानचंद अहिरवार की लगातार तीसरी फिल्म है। इससे पहले वे ‘जनहित में जारी’ और ‘कोस्टाओ’ जैसी चर्चित फिल्मों में भी अभिनय कर चुके हैं। ज्ञानचंद सागर के गौर नगर मकरोनिया निवासी श्री नत्थू सिंह अहिरवार एवं श्रीमती शांति अहिरवार के सुपुत्र हैं। उनके पिता पेशे से शिक्षक हैं, जबकि माता गृहिणी हैं। ज्ञानचंद आगामी दिनों में आने वाली फिल्मों ‘नागज़िला’, ‘उम्रक़ैद’ और ‘तुम्बाड 2’ में भी अभिनय करते नज़र आयेंगे।

ज्ञानचंद बताते हैं कि अभिनय के प्रति उनकी रूचि शुरू से ही रही है और उनका उद्देश्य सामाजिक जागरूकता और समाज की वास्तविकताओं से बड़े जनमानस को रू-ब-रू कराना है. इसलिए वे यथार्थ पर आधारित फिल्मों में काम करने को वरीयता देते हैं. हाल ही में रिलीज हुई फिल्म हीर-सारा दो ऐसी लड़कियों की कहानी है जो जीवन के संघर्षों से परिचय कराती है. इसमें दो लड़कियां व्यक्तिगत जीवन की समस्याओं का डटकर मुकाबला करती हैं और स्त्री सशक्तिकरण की नई मिशाल पेश करती हैं. इसमें कोई सुखांत नहीं है लेकिन युवतियों का अपनी स्वयं की पहचान के साथ जीना, अपनी खुशियों को हासिल करना और सेल्फ डिस्कवरी करना जैसे महत्त्त्वपूर्ण पड़ाव शामिल हैं.

ज्ञानचंद ने सोशल-कॉमेडी ड्रामा फिल्म ‘जनहित में जारी’ (2022) में भी अभिनय किया है जो महिलाओं के स्वास्थ्य, सुरक्षित यौन संबंध और स्त्री अस्मिता से जुड़े कई पहलुओं को रेखांकित करती है. इसी तरह फिल्म ‘कोस्टाओ’ (2025) एक बायोग्राफिकल क्राइम-ड्रामा फिल्म है, जो गोवा के एक निडर और ईमानदार कस्टम अधिकारी कोस्टाओ फर्नांडीस के वास्तविक जीवन से प्रेरित है जिसमें मुख्य भूमिका प्रख्यात सिने अभिनेता नवाजुद्दीन सिद्दीकी ने निभाई है। यह फिल्म एक ईमानदार सरकारी कर्मचारी की संघर्ष यात्रा को प्रतिबिंबित करती है जिसने भ्रष्ट और ताकतवर तंत्र सिस्टम के खिलाफ लड़ाई लड़ी.

ज्ञानचंद अहिरवार ने अपनी शिक्षा सागर स्थित डॉक्टर हरीसिंह गौर केंद्रीय विश्वविद्यालय से प्राप्त की है। उन्होंने बीसीए, एम.ए. (अपराधशास्त्र) तथा एम.पी.ए. (रंगमंच) की पढ़ाई की। छात्र जीवन से ही उनका रुझान अभिनय और रंगमंच की ओर रहा। अभिनय और थिएटर की बारीकियां उन्होंने अपने गुरु डॉ. राकेश सोनी जी के मार्गदर्शन में सीखीं। इसी दौरान उन्होंने राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर लोक नृत्य की प्रस्तुतियां देकर अपनी कला का प्रदर्शन भी किया। रंगमंच और लोक कला के क्षेत्र में उनके अनुभव ने उनके अभिनय कौशल को निखारने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

ज्ञानचंद का कहना है कि रंगमंच ने उन्हें अभिनय की मजबूत नींव दी और इसी अनुभव के कारण वे फिल्मों में अलग पहचान बनाने में सफल हो रहे हैं। छोटे शहर से निकलकर फिल्म इंडस्ट्री तक पहुंचने का उनका सफर संघर्ष, मेहनत और समर्पण का उदाहरण माना जा रहा है। स्थानीय लोगों और विश्वविद्यालय के शिक्षकों और विद्यार्थियों ने ज्ञानचंद की सफलता पर खुशी व्यक्त करते हुए कहा कि सागर जैसे शहर से निकलकर राष्ट्रीय स्तर पर पहचान बनाना युवाओं के लिए प्रेरणादायक है।


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