ज्ञान गुण सागर/सागर । एम.के. शर्मा, प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश, सागर द्वारा 26 अक्टूबर को केंद्रीय जेल सागर का निरीक्षण किया गया।
निरीक्षण के दौरान सर्वप्रथम प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश ने जेल के महिला वार्ड का निरीक्षण किया। उन्होंने महिला बंदियों से उनके प्रकरणों में अपील एवं जमानत आवेदनों की स्थिति के संबंध में चर्चा कर जानकारी प्राप्त की। उन्होंने निर्देशित किया कि विधिक सहायता के माध्यम से अधिक से अधिक पात्र बंदियों को लाभान्वित किया जाए, ताकि आर्थिक कठिनाइयों के कारण कोई भी बंदी न्याय प्राप्त करने से वंचित न रहे।
इसके उपरांत प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश ने जेल उद्योग परिसर में उपस्थित बंदियों को संबोधित करते हुए उन्हें उनके विधिक अधिकारों के प्रति जागरूक किया। उन्होंने कहा कि आर्थिक अभाव किसी भी व्यक्ति को न्याय प्राप्त करने में बाधा नहीं बनना चाहिए। पात्र बंदी जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के माध्यम से निःशुल्क विधिक सहायता प्राप्त कर सकते हैं। उन्होंने बंदियों को समय पर विधिक सहायता उपलब्ध कराने तथा उनकी समस्याओं का नियमानुसार निराकरण सुनिश्चित करने पर जोर दिया। साथ ही, बंदियों को उचित उपचार एवं आवश्यक स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराने की आवश्यकता पर भी बल दिया।
कार्यक्रम में उपस्थित जिला अधिवक्ता संघ, सागर के अध्यक्ष अंकलेश्वर दुबे ने कहा कि आर्थिक रूप से कमजोर बंदियों को उनके प्रकरणों में पैरवी, अपील एवं अन्य आवश्यक कानूनी कार्यवाहियों के लिए निःशुल्क अथवा न्यूनतम शुल्क पर अधिवक्ता उपलब्ध कराने की दिशा में सहयोग किया जाएगा, ताकि वे अपने विधिक अधिकारों का प्रभावी ढंग से उपयोग कर सकें।
निरीक्षण के दौरान प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश ने जेल की पाकशाला का निरीक्षण कर भोजन व्यवस्था का जायजा लिया। इसके पश्चात उन्होंने बंदी वार्ड का भ्रमण कर बंदियों से सीधे संवाद किया तथा उनकी समस्याओं एवं आवश्यकताओं के संबंध में जानकारी प्राप्त की।
इस अवसर पर सचिव, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, जिला अधिवक्ता संघ के अध्यक्ष एवं सचिव, जिला विधिक सेवा अधिकारी तथा जेल अधीक्षक रमेशचंद्र आर्य सहित जेल के अन्य अधिकारी एवं कर्मचारी उपस्थित रहे।